नीमच के बांगरेड़ से खबर: सोचिए सुबह-सुबह खेत की ओर निकले हों और रास्ते में सामने से मगरमच्छ आता दिखाई दे! कुछ ऐसा ही वाकया मंगलवार को नीमच जिले की सरवाणिया महाराज तहसील के बांगरेड़ गांव में हुआ। गांव में एक नहीं, दो मगरमच्छों के घुस आने से अफरा-तफरी मच गई, लेकिन जो हुआ, वो गांव की एकजुटता और सूझबूझ की मिसाल बन गया।
बरसात के दिनों में अक्सर नदियों और तालाबों का जलस्तर बढ़ जाता है, और ऐसे में कई बार जंगली जानवर अपना रास्ता भटक जाते हैं। ऐसा ही कुछ इन दो मगरमच्छों के साथ हुआ, जो बहते-बहते सीधे इंसानी बस्ती में आ पहुंचे।
पहला मगरमच्छ गांव के किनारे एक खेत में देखा गया। गांव वालों ने पहले तो डर के मारे दूरी बनाए रखी, लेकिन जब समझ आया कि वह वहीं रुका हुआ है, तो कुछ साहसी युवाओं ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने लकड़ी, रस्सी और चप्पल तक का इस्तेमाल करते हुए मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से काबू में किया। उसके मुंह को बांधा गया ताकि वह किसी को नुकसान न पहुंचा सके।
दूसरा मगरमच्छ गांव की दूसरी दिशा में एक नाले के पास देखा गया। इस बार लोगों ने कोई रिस्क नहीं लिया और सीधे वन विभाग को सूचना दी। विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सावधानी से रेस्क्यू कर मगरमच्छ को वापस उसके प्राकृतिक आवास की ओर ले गई।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था, लेकिन इस बार बारिश के कारण ऐसा लग रहा है कि पास के जलस्रोतों से मगरमच्छ बहकर गांव में पहुंच गए। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सभी चिंतित थे, लेकिन सभी की सजगता और प्रशासन की मुस्तैदी से कोई अनहोनी नहीं हुई।
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे मौसम में मगरमच्छों का आबादी वाले इलाकों में आना असामान्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई जानवर नजर आए तो खुद कुछ करने की बजाय तुरंत विभाग को सूचित करें।