अफीम नीति 2025-26 की पूरी जानकारी: सीपीएस पट्टों से लेकर मार्फीन औसत तक

किसान भाईयों के मन में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि अफीम नीति 2025-26 आखिर कब तक जारी होगी और इसमें क्या नए बदलाव होंगे। हर साल किसान बड़ी उम्मीदों के साथ इस नीति का इंतज़ार करते हैं क्योंकि यही तय करता है कि किसे पट्टे मिलेंगे और खेती की दिशा क्या होगी।

नीति कब तक आ सकती है?

जानकारों का कहना है कि अफीम नीति सितंबर 2025 के पहले हफ्ते में जारी हो सकती थी, लेकिन विभागीय स्तर पर मिली जानकारी बताती है कि अब यह नीति सितंबर के तीसरे या चौथे हफ्ते, यानी 15 सितंबर के बाद ही जारी होने की संभावना है।

किसानों की सबसे बड़ी चिंता: सीपीएस पट्टे

इस बार चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा सीपीएस (कंसंट्रेटेड पॉपपी स्ट्रॉ) पट्टों को लेकर है।

बहुत से किसान पूछ रहे हैं कि क्या होल्ड पर रखे गए पट्टे इस बार मिल पाएंगे।

क्या जिन किसानों ने अच्छी औसत दी है उन्हें पारंपरिक खेती (लूणी-चिरनी) का मौका मिलेगा?

विभाग भी असमंजस में है क्योंकि गोदाम पहले से भरे पड़े हैं और प्रोसेसिंग का काम अटका हुआ है।

किसानों की उम्मीदें क्या हैं?

जिन किसानों ने 100 किलो से ऊपर औसत दी है, उन्हें इस बार लूणी-चिरनी का पट्टा मिल सकता है।

वहीं, 50 किलो से ऊपर औसत वाले किसानों के लिए भी राहत की उम्मीद जताई जा रही है।

सांसदों की तरफ से भी सरकार पर दबाव है कि किसानों को अधिक से अधिक राहत दी जाए।

मार्फिन की उलझन

पिछले साल सरकार ने 4.2% औसत मार्फीन पर पट्टे दिए थे। किसान चाहते हैं कि इस बार केवल एक साल नहीं, बल्कि पिछले 5 सालों का औसत देखा जाए।
क्योंकि मार्फीन पूरी तरह से मौसम और प्रकृति पर निर्भर है – इसमें न किसान का दोष होता है और न ही विभाग का।

कानूनी अड़चनें और किसान विरोध

किसानों की बड़ी मांग यह भी है कि धारा 8/29 में बदलाव किया जाए।

अक्सर अवैध खेती से पकड़ी गई अफीम का बोझ निर्दोष किसानों पर डाल दिया जाता है।

इससे किसानों की छवि और पट्टे दोनों खतरे में आ जाते हैं।

साथ ही, लूई चिराई वाला डोडा (जिससे अफीम पहले ही निकाल ली गई हो) को भी नारकोटिक्स एक्ट में शामिल कर लिया गया है, जबकि इसमें नशे की मात्रा न के बराबर होती है। किसान चाहते हैं कि इसे एक्ट से बाहर किया जाए।

अफीम नीति 2025-26 किसानों के लिए कई उम्मीदें लेकर आ सकती है। सरकार और विभाग दोनों ही अभी पेच में फंसे हुए हैं, लेकिन किसानों की नज़रें सितंबर के तीसरे और चौथे हफ्ते पर टिकी हुई हैं।
किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि इस बार उन्हें न्याय मिले और सीपीएस से लेकर लूणी-चिरनी तक हर किसान को बराबरी का मौका दिया जाए।

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