भारत में सरसों किसानों की प्रमुख नकदी फसल है। हर किसान चाहता है कि उसके खेतों में सरसों की ऐसी वैरायटी. ( Sarso variety ) हो जो कम लागत में ज्यादा उत्पादन और अच्छी तेल मात्रा दे सके। लेकिन जब किसान बाजार में बीज लेने जाते हैं तो उन्हें तरह-तरह की वैरायटीज़ मिलती हैं और सही चुनाव करना मुश्किल हो जाता है।
कई बार किसान केवल भीड़ का अनुसरण कर लेते हैं और बाद में पछताते हैं कि चुनी हुई वैरायटी उम्मीद पर खरी नहीं उतरी। ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि सरसों की बेस्ट वैरायटी वही है जो –
1. हर तरह की मिट्टी और पानी में अच्छा प्रदर्शन करे।
2. विपरीत मौसम (ज्यादा ठंड, ओस या पाला) में भी टिक सके।
3. ज्यादा तेल मात्रा दे ताकि बाजार में अच्छे भाव मिलें।
4. स्थिर और भरोसेमंद उत्पादन दे।
5. बुवाई से पहले जरूरी सावधानियां
एक ही वैरायटी न बोएं: कोशिश करें कि कम से कम 2–3 वैरायटीज़ का चुनाव करें। इससे अगर किसी साल एक वैरायटी प्रभावित हो जाए तो दूसरी से नुकसान पूरा हो सके।
बेसल डोज़ सही दें: फास्फोरस, पोटाश और सल्फर की उचित मात्रा ज़रूर डालें। सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर बहुत ज़रूरी है।
सिंचाई का ध्यान रखें: सरसों को ज्यादा पानी पसंद नहीं है। कम सिंचाई और सही समय पर पानी देना उत्पादन के लिए बेहतर रहता है।
टॉप सरसों वैरायटीज़ और उनका प्रदर्शन
1. Pioneer 45S46
खूबियां:
अच्छी ब्रांचिंग और ज्यादा फलियां।
तेल मात्रा भी संतोषजनक।
लंबे समय तक किसानों की पहली पसंद।
कमियां:
पिछले कुछ सालों से उत्पादन घटा है।
ठंड और पाले से ज्यादा प्रभावित होती है।
समय पर कटाई न करने पर झड़ने की समस्या।
बीज की प्योरिटी पर सवाल उठने लगे हैं।
2. Advanta 414
खूबियां:
ठंड और विपरीत मौसम में भी स्थिर उत्पादन।
अगेती, सामान्य और पछेती सभी समय पर बुवाई योग्य।
मोटे दाने और अच्छी तेल मात्रा।
कम सिंचाई पर भी अच्छा प्रदर्शन।
कमियां:
चौड़े पत्तों के कारण ज्यादा गहराई पर बुवाई न करें।
ज्यादा सीड रेट और अधिक पानी देने से वाइट रस्ट का खतरा।
3. Advanta ADV 427
खूबियां:
पछेती बुवाई में भी अच्छा उत्पादन।
हल्की और भारी दोनों मिट्टी में सफल।
मोटे और भरे हुए दाने।
विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर परफॉर्मेंस।
कमियां:
नई वैरायटी होने के कारण अभी सीमित किसानों ने लगाया है, लेकिन फीडबैक सकारात्मक है।
4. Shriram 1666
खूबियां:
लंबे समय से किसानों की भरोसेमंद वैरायटी।
मोटे, चमकीले दाने और उच्च तेल मात्रा।
येलो रस्ट और वाइट रस्ट के प्रति सहनशील।
हर तरह की मिट्टी और समय पर बुवाई योग्य।
कमियां:
पौधे की ऊंचाई अधिक, इसलिए ज्यादा सिंचाई करने पर गिरने का खतरा।
अगर आप सरसों की खेती कर रहे हैं तो केवल एक ही वैरायटी पर निर्भर न रहें। बेहतर होगा कि 2–3 अलग-अलग टॉप वैरायटी लगाएं। इससे जोखिम कम होगा और उत्पादन की संभावना बढ़ेगी।
स्थिर उत्पादन और विपरीत परिस्थितियों के लिए → Advanta 414 और ADV 427
लंबे समय से भरोसेमंद और ज्यादा तेल मात्रा के लिए → Shriram 1666
पारंपरिक रूप से लोकप्रिय लेकिन अब धीरे-धीरे कम होती क्षमता → Pioneer 45S46
सही बीज चयन और संतुलित खाद प्रबंधन से किसान आसानी से 12–15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन और 42–44% तक तेल मात्रा हासिल कर सकते हैं।
यह आर्टिकल किसानों के अनुभव और रिसर्च पर आधारित है। अगर आप भी इन वैरायटीज़ में से किसी को लगाते हैं, तो अपनी राय और अनुभव जरूर शेयर करें।