चना खेती के 7 राज़ – उपज बढ़ाएँ और मुनाफा पाएं

चना रबी मौसम की प्रमुख दलहनी फसल है। सही समय, उचित किस्म और आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान भाई इस फसल से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञ अमोल पाटील के अनुसार, चने की खेती में सफलता पाने के लिए निम्न सुझाव बेहद महत्वपूर्ण हैं।

1. बुवाई का सही समय

जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा नहीं है, उन्हें 15 अक्टूबर से 30 नवम्बर के बीच बुवाई करनी चाहिए।

जिनके पास सिंचाई की सुविधा है, वे 15 दिसम्बर तक भी बुवाई कर सकते हैं।

देर से बोवाई करने पर उपज में गिरावट आती है।

2. उचित भूमि का चुनाव

चने की फसल मध्यम से हल्की काली मिट्टी में अधिक उत्पादन देती है।

भारी जमीन या पानी भरने वाली जमीन में इसकी पैदावार घट जाती है।

3. बीज एवं किस्म का चयन

सही किस्म चुनने पर किसान को 20% तक अतिरिक्त उपज और बाजार में अच्छा भाव मिलता है।

बीज की मात्रा 35–40 किलो प्रति एकड़ पर्याप्त रहती है।

बोवाई से पहले बीज को फफूंदनाशी (fungicide) और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना ज़रूरी है।

4. बीज उपचार (Seed Treatment) क्यों ज़रूरी है?

अमोल पाटील बताते हैं कि—

बीज उपचार करने से पौधों में विल्टिंग रोग (सूखने की बीमारी) कम होता है।

पौधे की जड़ें मज़बूत बनती हैं और फसल अधिक फूल व दाने देती है।

बिना उपचार के बोये गए बीज से फसल 20–25% तक घट सकती है।

5. खाद एवं सिंचाई प्रबंधन

बोआई के समय खेत में डीएपी व सिंगल सुपर फॉस्फेट का उपयोग करना चाहिए।

फसल को फूल आने और दाने भरने की अवस्था में पानी देने से उत्पादन बढ़ता है।

अधिक पानी देने से फसल पीली पड़ जाती है और नुकसान होता है।

6. रोग एवं कीट नियंत्रण

चने में प्रमुख रोग: फ्यूजेरियम विल्ट, ब्लाइट और चना फली छेदक कीट।

समय पर दवाई का छिड़काव और खेत की निगरानी से नुकसान कम किया जा सकता है।

7. संभावित उत्पादन

सही तकनीक अपनाने वाले किसान भाई 10–15 क्विंटल प्रति एकड़ तक चने का उत्पादन आसानी से ले सकते हैं।

दाने मोटे, साफ और अच्छे क्वालिटी के होने पर बाजार में ज्यादा दाम मिलते हैं।


यदि किसान भाई सही किस्म का चुनाव, बीज उपचार, संतुलित खाद और समय पर सिंचाई का ध्यान रखें तो चने की खेती से बेहतर उत्पादन और अच्छा लाभ दोनों मिल सकते हैं।

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