एलीफेंटा लहसुन खेती: कम खर्च, ज्यादा उत्पादन और बेहतरीन क्वालिटी

नमस्कार किसान भाइयों! आज हम आपको शक्करखेड़ी जागीर गांव के किसान श्यामलाल जी के खेत से एक खास किस्म के लहसुन की खेती के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। श्यामलाल जी ने अपने खेत में एलीफेंटा वैरायटी का लहसुन लगाया, और इसका उत्पादन व क्वालिटी देखकर हर किसान प्रभावित हो जाएगा।

एलीफेंटा लहसुन की खासियत

इस वैरायटी की कलियां बहुत बड़ी और भारी होती हैं।

बीज की लागत कम है और उत्पादन के हिसाब से खर्चा भी कम आता है।

रोग और कीटों से बचाव में यह लहसुन बेहद सक्षम है।

बीज और रोपाई का तरीका

श्यामलाल जी ने यह बीज झालावाड़-पाटन से सीधे किसान से खरीदा।

10 क्विंटल बीज से लगभग 4-5 बीघा खेत में रोपाई की गई।

रोपाई का सही समय सितंबर-अक्टूबर है। अक्टूबर में भी रोपाई करने पर उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

प्रति बीघा उत्पादन लगभग 22 क्विंटल आता है। अगर भूमि भारी और उपजाऊ हो, तो उत्पादन 30 क्विंटल तक भी हो सकता है।

उगाने की विशेष बातें

1. एलीफेंटा लहसुन लगातार लहसुन उगाई गई जमीन में भी आसानी से उगता है, और इसमें घेरा लगने की समस्या नहीं आती।

2. खाद की जरूरत कम है। पारंपरिक देसी लहसुन की तुलना में यह कम खाद में भी बेहतर उत्पादन देता है।

3. रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अच्छी है, इसलिए केवल 4-5 बार स्प्रे करना पर्याप्त होता है।

4. पत्तियां चौड़ी और पौष्टिक होती हैं।

पकने और भंडारण की जानकारी

पकने की अवधि लगभग 5 महीने (150 दिन) है। भारी भूमि में यह 10 दिन अधिक भी लग सकता है, लेकिन इससे कंद का आकार और गुणवत्ता बढ़ती है।

भंडारण के लिए जूट के बोरे सबसे बेहतर हैं। बोरे में लहसुन का रंग और वजन लंबे समय तक बना रहता है।

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