आज 27 सितंबर 2025, शनिवार के दिन मध्य प्रदेश के मौसम में बड़ी उठापटक देखने को मिल रही है। पिछले दिनों कुछ जिलों में हल्की बारिश दर्ज हुई, जबकि कई जिलों में बादल छाए रहे लेकिन बरसात नहीं हुई। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से नमी मिलने के कारण आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां और तेज़ हो सकती हैं।
कहां होगी बारिश?
खंडवा: जहां कल कुछ गांवों में बूंदाबांदी हुई थी, आज 20–25 गांवों में बारिश की संभावना है।
धार, बड़वानी, झाबुआ, अलीराजपुर: यहां 30–40 गांवों में मध्यम से तेज़ बारिश देखने को मिल सकती है।
शहडोल, मंडला, अनूपपुर, डिंडोरी, बैतूल, होशंगाबाद, हरदा, देवास, भोपाल, गुना, राजगढ़, शाजापुर: इन जिलों में बिखरी हुई बारिश होगी।
उज्जैन और इंदौर: यहां दोपहर बाद से बारिश शुरू होने के आसार हैं।
रतलाम, मंदसौर, नीमच: आज बारिश नहीं होगी, लेकिन 28 से 30 सितंबर के बीच यहां भी अच्छी बरसात हो सकती है।
मानसून की विदाई में देरी
पहले अनुमान था कि 3–5 अक्टूबर तक मानसून विदा हो जाएगा, लेकिन अब स्थिति को देखते हुए अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक बारिश की गतिविधियां जारी रहने के आसार हैं।
किसानों की समस्याएं और समर्थन मूल्य का सवाल
बारिश के साथ-साथ किसानों की बड़ी चिंता फसलों के दाम को लेकर भी है।
सोयाबीन के समर्थन मूल्य पर सवाल उठ रहे हैं। किसान भाइयों का कहना है कि भावांतर योजना (5300 रु./क्विंटल के आसपास) केवल कागज़ों तक सीमित है।
वास्तविकता यह है कि मंडियों में उपज साफ-सुथरी और मानक गुणवत्ता के बिना नहीं खरीदी जा रही, जबकि खेत से निकलने वाली सोयाबीन में मिट्टी और डंठल रहना स्वाभाविक है।
ऐसे में किसान की लागत तक पूरी नहीं हो पा रही।
किसानों का आरोप है कि खाद, यूरिया की किल्लत और जंगली सूअर/नीलगाय से फसलें पहले ही प्रभावित हो रही हैं। जब किसी तरह उत्पादन होता है तो मंडी में सही दाम नहीं मिलता।
किसानों की अपील
किसान समुदाय प्रशासन से मांग कर रहा है कि केवल योजनाओं और ज्ञापन तक सीमित न रहकर वास्तव में किसानों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाए। समर्थन मूल्य की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और खरीदी के मानक खेत की वास्तविक स्थिति के अनुसार तय किए जाएं।